आदिम जनजाति परिवार को शिक्षक ने दिखाया ठेंगा निजी हैंडपंप कह कर ले गए हैंडपंप बोरिंग हुई क्षतिग्रस्त कौन है शिक्षा विभाग के अधिकारी जिनका था आदेश
प्रखंड मनातू आदिम जनजाति परिवार के लोग अभी भी शुद्ध पेयजल हेतु दर दर भटकने को मजबूर
संवाददाता मिथिलेश यादव
पलामू: जिले के अति नक्सलवाद संवेदनशील इलाका माने जाने वाला मनातू प्रखंड जहां आज भी लोग आजादी के पहले वाले युग जैसे जीवन यापन कर रहे है मनातू प्रखंड पंचायत डुमरी ग्राम केदल के टोला पथलगढ़वा में केवल आदिम जनजाति परहिया परिवार के 20 से 25 घर का टोला है जहां लोग आज भी नदी नाला नदी के चुनगाड़ी के गंदा पानी पीकर गुजर बसर कर रहे है
दरअसल खास बात तो यह है कि आजादी के 78 साल पूरे हो चुके है राज्य सरकार तथा केंद्र सरकार की पहली प्राथमिकता है हर घर को शुद्ध पेयजल क्या लगता इन आदिम जनजाति परहिया परिवार सदस्यों का कोई हक नहीं है शुद्ध पेयजल को इस ग्राम के टोला में ना पानी, ना बिजली,ना सड़क, ना गली,ना नली साफ शब्दों में कह सकते है सरकारी तंत्रों में आवास,राशन सुविधाएं छोड़कर बाकी सभी विभाग की सुविधाएं शून्य नजर आ रही है जब की राज्य सरकार तथा केंद्र सरकार इन परिवारों के लिए नई नई स्कीम चलाती ताकि आदिम परिवार के लोग विलुप्त ना हो जाए। जीवन जीने के शुद्ध बहुत महत्वपूर्ण होता है पलामू सिविल सर्जन डॉ अनिल श्रीवास्तव ने बताया कि जीवन का सबसे महत्व शुद्ध पेयजल यानी नदी नाला चुनगाड़ी के पानी बहुत दूषित होता है दूषित पानी पीने से अनेकों बीमारियां अपनी चपेट ले सकती है
खास बात तो यह है कि लगभग वर्ष 2002 केदल टोला पथलगढ़वा में न्यू प्राथमिक विद्यालय का गठन हुआ था उस समय ग्रामीणों में खुशी का माहौल था क्योंकि बच्चे को पानी पीने के लिए विद्यालय प्रांगण में हैंड पम्प चपानल लगा जिससे ग्रामीण को पहली बार शुद्ध पेयजल मिला यह विद्यालय लगभग 12 साल से 14 तक चला था वर्ष 2015 में विद्यालय मर्ज हुआ तो केदल चला गया। वरीय विद्यालय शिक्षक को सीकनी टोला फ़टरिया न्यू प्राथमिक का शिक्षक बनाया गया जो विद्यालय अभी प्रारंभ है
आदिम जनजाति परिवार को शिक्षक ने दिखाया ठेंगा
महिलाएं तथा ग्रामीण ने बताया कि वर्ष 2015 विद्यालय मर्ज के बाद वरीय पारा शिक्षक द्वारा अपना निजी हैंड पम्प कहकर हैंड पम्प खोल लिया गया है वर्ष 2015 से आज तक ग्रामीण नदी नाला से पानी पी रहे है
आदिम जनजाति परिवार के लोग कब तक जुर्म और शोषण का जिंदगी बिताएंगे। इसे आप साफ कह सकते हैं आजाद भारत में आज भी आदिम जनजाति के लोग गुलाम की जिंदगी जी रहे हैं मैं इस पंचायत का नहीं बल्कि मनातू प्रखंड की जितने भी पंचायत या ग्राम में आदिम जनजाति के लोग निवास करते है उनकी यही समस्या उत्पन हो रही शुद्ध पेयजल स्वास्थ्य शिक्षा सड़क बिजली इत्यादि तमाम ऐसी सरकार की सुविधा उन लोगों के बीच नहीं पहुंच पा रही है महिलाएं ने बताया कि हम लोग जंगली जड़ी बूटी जंगल से लाते हैं और उसी को बेचकर परिवार का लालन पालन कर रही हूं।
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